“आंसू “

खारे खारे से आंसू ,
एक सशक्त सहारे आंसू ,
काश तुम बोल पाते ,
मन की गिरह खोल पाते ,
यूं तो अविरल बहते जाते हो ,
हर सुख – दुख में साथ निभाते हो ,
किसी पर हुए अन्याय को सह ना पाते हो ,
मन के कृंदन को तुम्ही तो दर्शाते हो ,
पर कुछ कह क्यों ना पाते हो ?
शोषण हो नारी का या भय हो महामारी का‌ ,
क्यों विव्हल हो जाते हो , आक्रोश बन बह जाते हो ,
आवेश में भी कोने में खड़े सकुचाते हो ,
हिंसा देख घबरा जाते हो ,
नैनों से अटूट रिश्ता निभाते हो ,
ग्लानी हो तो भी आ जाते हो ,
आकर आईना दिखा जाते हो ,
प्रसन्नता में भी आंखें नम कर जाते हो ,
बस मूक खड़े रह जाते हो ,
भावनाओं से गहरा तुम्हारा नाता है ,
क्यों कोई तुम्हें समझ ना पाता है ?
नारी की शक्ति भी हो ,
देवी की भक्ति भी हो ,
पर तुम्हें मिलता सम्मान नहीं ,
तुम्हारी कोई पहचान नहीं ,
इंसान बोल सकता है फिर भी खामोश बैठा है ,
हर जगह होता अन्याय जाने कैसे सहता है ?
तुम बिन बोले सब कह जाते हो ,
शायद इसीलिए आंसू कहाते हो ।

” KARMA”

” You sow what you reap ”

is a common proverb often forgotten in distress . People crib , cry and hold God responsible for all the sufferings they are going through .
People ignore their blessings . Problems given by God to us are jist for checking our patience and are the testing points by God . Rather than blaming , people should simply believe in karma .
Rashida Rowe once stated ,

” Karma is a boomerang , whatever you give out will come back to you “.

” मां – बाप “

जिस बच्चे को दुनिया में लाने के लिए
मां सौ दुख झेलती है ,
वही मां आज किसी काम की नहीं ,
जो बाप बच्चे की हर सुख – सुविधा के लिए
अपनी हर खुशी का बलिदान देता है ,
उसे ही दुनियादारी की समझ नहीं ,
जिस छोटे बच्चे की तुतलाती भाषा
मां-बाप झट से समझ जाते थे ,
आज वही बच्चा अपने मां-बाप की बोली हुई बात भी समझ पाता नहीं ,
जो सर किसी के आगे कभी झुका नहीं
बच्चे की जिद के आगे हर बार झुकता रहा ,
पर उन मां – बाप को बच्चे की परवाह ही नहीं ,
बच्चे की परवरिश के लिए अपने
संगी-साथी तक जिन्होंने छोड़ दिए ,
वही बच्चों के दोस्तों में कहीं गुम हो कर रह गए ,
जिन बच्चों को मां – बाप ,
हमेशा साथ लेजाकर फ़ूले न समाते थे ,
वही बच्चे आज मां – बाप से कतराते फिरते हैं ,
शायद इसे ही आधुनिक युग कहते हैं ,
कभी किसी मां – बाप पर यह दिन ना आए
कि वो अपने बच्चे के मोहताज हो जाएं ,
काश भगवान हर मां – बाप के ,
हाथ पैर सलामत रख कर ही इस दुनिया से विदा करवाए ।

🙏🙏🙏🙏

” GET WELL SOON “

Get well soon is a phrase used to express hope that the listener will recover soon from the illness . Here I’m emphasizing on the illness of thoughts and deeds of people which need to be cured to make this world a happy place to live in .

Get well soon to the hypocrites who puts religion above god…..

Get well soon to the corrupt leaders who betray and harm the naive public……

Get well soon to inconsiderate people who ask women to stay at home to avoid rape….

Get well soon to the thankless bunch of people who questions the loyalty of a soldier…..

Get well soon to the reluctant people who are not thankful for what they have on their plates……

Get well soon to the philanthropist who do charity only to post it on social media to gain likes and comments…….

Get well soon to the egocentrics who do not respect the poor…….

Get well soon to humanity which do not help the needy……

” N R I का दर्द “

बेगानी धरती पर ,
बेगाने देश में रहना आसां नहीं ,
पर यह दर्द किसी को दिखता नहीं ,
दिखता है तो आधुनिक जीवन ,
लुभाती है उनकी मोटी इनकम ,
हंसते मुस्कुराते चहरों का दर्द देखा है मैंने ,
परिजनों से दूर दुख – दर्द अकेले पड़ते हैं सहने ,
हर तीज त्योहार में अपनों की याद अकसर आ ही जाती है ,
वीडियो कॉल में वो आलिंगन की गरमजोशी कहां मिल पाती है ,
यूं तो सुविधाएं बहुत सी हैं वहां ,
माता-पिता का साथ तो छूट गया यहां ,
आशीष चाहे उनका हर पल साथ रहता है ,
पर उनकी गोद में सिर रखने को मन बार-बार कहता है ,
भारत में रहने वालों को लगती बाहरी देशों की जिंदगी आसान ,
पर घर चलाने की जद्दोज़हद वहां भी है घमासान ,
सारा काम खुद से ही करना पड़ता है ,
जाने कितनी बार खुद से लड़ना पड़ता है ,
दुख बीमारी में खुद का ध्यान खुद ही रखना पड़ता है ,
मशीन की तरह हर वक्त चलना पड़ता है ,
नहीं मिलती किसी से सांत्वना ना ही प्रोत्साहन ,
खुद ही देते होंगे मन को आश्वासन ,
सोचते होंगे कभी कमजोर पलों में ,
ठाठ से रहते थे अपने घरों में ,
चले तो आए यहां सपनों की उड़ान भरने ,
परिवार के सपनों को साकार करने ,
पर न तो यह हवा अपनी है ,
ना ही यह धरा अपनी है ,
जी रहे हैं बस जीने को ,
N R I का फ़र्ज़ निभाने को ।

” SACRIFICE “

Each one of us make sacrifices for our loved ones . Some are acknowledged and some are left unnoticed . It is believed that Mothers are the givers they sacrifice a lot for the kids but nobody speaks about the sacrifices made by a Father . Being a mother I understand what we go through whole our lives by giving up on each and every wish of ours for our kids . Similarly sacrifices of a Father cant be left ignored . His children are his priority . Comforting the kids with expensive clothes , shoes and gadgets is all a father does his entire life . He ignores his comfort and needs just to build a life worth living for his children . Despite working tremendously his whole life he just expects respect , love and care of his children when he grows old . A Mother nurtures children’s dreams but a father tries to fulfill them at any cost . But all his sacrifices remains unnoticed . Whenever anyone claims that Mothers are the epitome of sacrifice they should never forget the sacrifices made by a Father . I read somewhere ,

” A father’s sacrifices are like mountains “.

It’s true , we can’t imagine how high a mountain is simply by looking at it . We need to experience it in order to have an idea about its height . Similarily , father’s sacrifices can only be addressed by experiencing the pure and unconditional love of a Father .

“बिरयानी सी शादी”

आज मेरे लेख का विषय कुछ अटपटा लगेगा आपको और मैं कोशिश करूंगी कि आपको अपना मंतव्य समझा सकूं ।

बिरयानी का नाम लेते ही मुंह में तरह-तरह के स्वाद घुलने लगते हैं , तीखा , करारा और चटपटा सा । शादी भी तो बिरयानी की तरह ही मसालेदार और चटपटी है, जिसमें तीखा स्वाद भी है और करारापन भी। शादी से मेरा मानना है पति – पत्नी की वैवाहिक जिंदगी । जैसी बिरयानी में अलग-अलग प्रकार के मसाले डाले जाते हैं उसी प्रकार शादी में अलग-अलग प्रकार की भावनाओं का समावेश होता है । बिरयानी एक ऐसा पकवान है जिसमें जितनी अधिक सामग्री का उपयोग होगा उतना ही उसका स्वाद निखर कर आता है ऐसे ही शादी में भी जितनी ज्यादा सूझ- बूझ और आपसी तालमेल हो तो शादीशुदा जिंदगी भी संवर जाती है । यदि हम बिरयानी की हांडी को तेज आंच पर चढ़ाते हैं तो वह अच्छे से नहीं पकती और कभी-कभी तो जल भी जाती है उसी तरह यदि शादीशुदा जिंदगी को सम्मान और प्रेम की धीमी आंच पर नहीं व्यतीत करेंगे तो वह नीरस और बेस्वाद हो जाएगी ।

अच्छी बिरयानी बनाने की विधि से ही आपको पता चलेगा कि अच्छी शादीशुदा ज़िंदगी कैसे बिताई जाती है ?

बिरयानी बनाने के लिए हांडि या कढ़ाई को चूल्हे पर चढ़ा कर उसमें छौंक लगाया जाता है जिसमें तरह-तरह के मसाले डाले जाते हैं फिर चावल की तह लगाई जाती है उसके ऊपर सब्जियों की परत लगाई जाती है , ऐसे ही दो तीन बार तह बिठाकर उसको ढक्कन से ढक कर दम दिया जाता है और आंच बिल्कुल धीमी कर दी जाती है जिससे वह धीरे – धीरे पकती रहे और मसाले अपनी खुशबू और स्वाद छोड़ते रहें ।

शादी में भी दूल्हा और दुल्हन को फेरों की वेदी पर बैठा कर सात वचनों का छौंक लगाया जाता है जिससे वह आजीवन एक दूसरे के साथ घुल मिलकर रहें । शादी के उपरांत बिरयानी की तरह ही गृहस्थ जीवन में तरह-तरह के मसाले यानी भावनाओं का समावेश होता है । एक दूसरे का ख्याल रखना, एक दूसरे का सम्मान , एक दूसरे से प्रेम , नोकझोंक , रूठना मनाना परंतु एक दूसरे के साथ घुल- मिल कर हर सुख – दुख में साथ निभाते हुए जीवन यापन करना ही एक सफल शादी का गुरु मंत्र है । बिरयानी की परतों की तरह ही वैवाहिक जीवन में रिश्तों का महत्व होता है जैसे माता – पिता , सास – ससुर , देवर – ननंद, साला – साली इत्यादि । अगर यह रिश्ते ना हो तो शादीशुदा जीवन फीका और नीरस लगने लगेगा ठीक वैसे ही जैसे बिना परतों के बिरयानी । जिस तरह बिरयानी को ढ़क कर पकाया जाता है उसी तरह शादी को भी परिवार रूपी ढ़क्कन के साथ ढ़क कर ही निभाया जाता है । (यहां ढक्कन का तात्पर्य आप गलत ना लें ) यदि बिरयानी ढ़क कर ना बनाई जाए तो उसके हंडिया से गिरने का डर रहता है , पकने में समय अधिक लगता है और चावल की नमी भी खत्म हो जाती है उसी प्रकार परिवार रूपी ढक्कन यदि साथ है तो वैवाहिक जीवन सुदृढ़ होता है , छोटी मोटी कमियां जग जाहिर नहीं होती , रिश्तों में आई हर ऊंच नीच संभल जाती है और पति – पत्नी के रिश्ते की नमी बरकरार रहती है । बिरयानी बिना दम दिए स्वादिष्ट नहीं बनती उसी प्रकार शादी रूपी बिरयानी में बच्चे दम का काम करते हैं जिनके बिना शादी अधूरी है । जिस प्रकार दम देने से बिरयानी की परतें एक दूसरे के साथ जुड़ उसे शानदार बनाती हैं वैसे ही बच्चे पति – पत्नी को साथ बांधे रखते हैं उनके बिना पति पत्नी का व्यक्तित्व अधूरा रहता है , बच्चों के सानिध्य से जीवन रूपी बगिया महकती रहती है । शादीशुदा जोड़े की गृहस्ती में मेहमान और मित्र गण का आना इलायची और सूखे मेवे के समान है जिनका बिरयानी में प्रयोग होने से वह और स्वादिष्ट बन जाती है । जैसे बिरयानी में हम और बहुत सी सामग्री डाल सकते हैं वैसे ही शादीशुदा जिंदगी में हम नाना प्रकार की भावनाओं और साझेदारीओं को समाहित कर उसे मनोरम बना सकते हैं ।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अगर हम बिरयानी के छौंक को चूल्हे पर चढ़ा कर भूल जाएंगे और कड़छी से नहीं हिलाएंगे तो वह जल जाएगा और बदबू पूरे घर में फैल जाएगी उसी प्रकार हमें शादीशुदा जिंदगी को प्रेम रूपी कड़छी से हिलाते रहना चाहिए जिससे आपसी रिश्ते ना तो जले , न ही उनमे तेज सेक लगे और न ही वह परिवार एवम् समाज में बदबू और धुंआ फैलाएं ।

अब मेरे पाठक मित्र समझ पाएंगे कि मैंने शादी को बिरयानी जैसा क्यों कहा । भगवान से यही प्रार्थना है कि आप सबकी जीवन हांडी में शादी रूपी जो बिरयानी पक रही है उसमें सदा स्वाद और मिठास बनी रहे ।

” WHY ? “

Why do people expect so much from me ?
I am also a human not God ….
Why am i always criticized ?
I do have a perspective ….
Why do people behave fake in front of me ?
I do know their real faces ….
Why people take me for granted ?
I do have some existence ….
Why am i easily available for people ?
Yes i spare time especially for them….
Why are people manipulative for me ?
I do have an opinion ….
Why do people bitch behind my back ?
I do have ears to listen ….
Why people think I can’t retaliate ?
I do have a voice ….
Why are people hurtful ?
I do have a heart which feels pain ….
Why , Why , Why ??????