” मैं दुखी क्यों ? “

दुख क्या है ?

जो वस्तु विशेष हमें अप्रिय लगे वह हमारे लिए दुख बन जाता है ।

आज प्रत्येक मनुष्य कहता है , मैं दुखी क्यों , भगवान ने मुझे दुख क्यों दिया है ? मैं ही मिला था भगवान को दुख देने के लिए ! जब मन विषाद से भर जाता है तो ऐसी ही भावना उत्पन्न होती है ।

आपने अवश्य कुछ ऐसा किया है या कर रहे हैं जिसके कारण आप दुखी हैं। परमात्मा भूल नहीं करते , न ही प्रकृति गलती करती है । आप अपनी जिंदगी को देखो , अपने जीवन को निहारो , आपको अपने दुख का कारण स्वत: ही मिल जाएगा ।

“फल कर्म का मिला ही करता है ,
फूल हर टहनी पर खिला ही करता है ,
भूकंप आने पर क्या कुछ नहीं बदल जाता ,
नींव हो या कंगूरा हिला ही करता है ।।”

आपने जो कुछ दिया है वहीं मिल रहा है , आपने जो कुछ बोआ है वही काट रहे हो ।

हम भूल जाते हैं देते समय , हम भूल जाते हैं बोते समय । हम सोचते हैं कि बीज तो हमने बोए थे अमृत के और फल मिल रहे हैं विष के , किया तो हमने भला था और हमारे साथ हो रहा है बुरा , दिए थे हमने आशीर्वाद और मिल रहीं हैं गालियां , दिया था प्यार और मिल रही है फटकार…..

नहीं!

यह संभव ही नहीं , यहां पाई – पाई का हिसाब होता है , रत्ती – रत्ती का हिसाब होता है । हमने जो किया है हमें वही मिल रहा है , जीवन में बेहिसाब कुछ भी नहीं होता।

” कर्म यदि शुभ है तो फल शुभ ही मिलेगा,
शूल अगर बोओगे तो फूल कैसे खिलेगा ? “

इतिहास साक्षी है कि परमात्मा को भी मनुष्य जीवन में आकर दुख भोगने ही पड़ते हैं , कर्मों का चक्र तो वह भी नहीं तोड़ पाते ।
यह जानना आवश्यक है कि अगर हम दुखी हैं तो उसका कारण हम स्वयं हैं , कोई और हमें दुख नहीं दे सकता , ना ही किसी के कारण हम दुखी हो सकते हैं ।
अगर हम चाहते हैं कि हम सुखी रहे तो हमें दूसरों के सुख का ध्यान रखना होगा । दूसरों के सुख में ही अपना सुख ढूंढना होगा ।

” जीवन जो मिला है उसे जीना सीखो,
कपड़ा फट भी गया है तो सीना सीखो ,
जन्म लिया है तो रोने से क्या होगा ,
जीवन अगर जहर भी है तो पीना सीखो । “

Published by Beingcreative

A homemaker exploring herself!!

10 thoughts on “” मैं दुखी क्यों ? “

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