” सरकारी लिफाफा “

एक दिन आंगन में मेज सजाया ,
कविता लिखने का मन था बनाया ,
इतने में कोरियरवाला आया,
एक बंद लिफाफा लाया,
देख सरकार की मोहर ,
हमारा तो भेजा चकराया ,

कलेजा हमारे मुंह को आया ,
कोरियर बॉय ने हमें संभाला ,
हाथ पकड़ सिग्नेचर करवाया ,
बंद लिफाफा हमनें खोला ,
पढ़ हमारा दिल था डोला ,
लिखा था उसमें ,
आकर मिलो प्रेसिडेंट से ,
याद आ गया कल ही का दिन ,
गालियां दी थी प्रेसिडेंट को गिन – गिन ,
केस बढ़ रहे करोना के हर दिन ,
और ,
प्रेसिडेंट करा रहे हैं लॉकडाउन को छिन्न-भिन्न !!
ऐसे कैसे हम बचेंगे ?
कोविड की चपेट में सब फंसेंगे ,
खड़ा वही था एक इंस्पेक्टर ,
शायद पड़ गया है वही चक्कर ,
सोचा ,
अगर ना गए तो और फसेंगे ,
लोग भी तो खूब हसेंगे ,
सैनिटाइजर हाथ में लेकर ,
एन -75 मास्क पहनकर ,
एहतियात को ध्यान में रखकर ,

चल पड़े हम बस पकड़ कर ,
सैनिटाईज़िंग टन्नल से होकर ,
पहुंचे हम प्रेसिडेंट के दफ्तर ,
आंखें हो रही थी हमारी नम ,
निकल गया था सारा दम ,
नमस्कार किया उनको ,
लगा कूटेंगें अब वह धुन को ,
पर ,
हमें अपने पास बुलाया ,
सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर ,
सामने की कुर्सी पर बिठाया ,
पैर हमारे कांप रहे थे ,
और वह सब कुछ भांप रहे थे ,
हाथ जोड़कर हमको बोले ,
बोली में जैसे मधु घोले ,
मिस्टर खत्री , बनिए हमारे प्रधानमंत्री ,
हमारे नीचे से खिसकी कुर्सी ,
भागे – भागे आए संतरी ,
हमें उठाकर फिर से बैठाया ,
बिसलेरी का पानी पिलाया ,
हम तो कवी हैं हमने बोला ,
विचार कीजिए आप थोड़ा ,
अगर प्रधानमंत्री हम बनेंगे
तो मोदी जी क्या भजिए तलेंगे ?
प्रेसिडेंट महोदय ने फरमाया ,
मोदी जी को देना है आराम ,
कर लिए उन्होंने बहुत से काम ।
हमने कहा सोचेंगे हम ,
इतना कह निकल आए हम ,
इतने में लगी ठोकर एक ,
गिरे सड़क पर फट गया पेट ,
चीख हमने मारी जोर से ,
पानी गिरा हम पे चंहु ओर से ,
देखा पड़े थे हम बिस्तर पर ,
श्रीमती खड़ी थीं बाल्टी लेकर ,
बोलीं ,
बहुत उड़ लिए स्वप्नलोक में ,
अब आ जाएं पृथ्वीलोक में ,
रसोई आपकी प्रतीक्षा में हैं ,
पुत्र आपका ई कक्षा में है ,
कामवाली ने नहीं है आना ,

क्यूंकि उसे हुआ कोरोना ,
हमको भी है दफ्तर जाना ,
कविता बैठकर बाद में बनाना ,
पहले घर का काम निपटाना ,
पहली बार मधुर लगा ,
पत्नी का वह भीषण ताना ,
कर्कश ध्वनि भी हमें लगी ,
जैसे कोई रोमांटिक गाना ।
हमने सोचा ,
इतना करने पर भी ,
मोदी जी की होती है खिंचाई,
हम तो घर में ही ठीक हैं भाई ,
प्रधानमंत्री पद से तो ,
घर के काम ज्यादा सुखदाई ,

जहां देती है सिर्फ ,

श्रीमती की खरी – खोटी सुनाई ,

जान में जान हमारी आई
हमने उठ कर ली जम्हाई ।

Published by Beingcreative

A homemaker exploring herself!!

9 thoughts on “” सरकारी लिफाफा “

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