” धरती “

माटी से ही जन्म हुआ है ,
माटी में मिल जाना है ,
धरती मां की देखरेख कर ,
अपना फर्ज निभाना है ।।

धरती से ही जीवन अपना ,
धरती पर सजे हर सपना ,
जीव सभी धरती पर रहते ,
सात समुंदर यहीं तो बहते ,
फल – तरकारी यहां है उगते ,
धान – फसल भी यहां है उपजे ,
इस सोना उगलती भूमी को ,
अधिक उपजाऊ बनाना है ,
धरती मां की देखरेख कर अपना फर्ज निभाना है ,
माटी से ही जन्म हुआ है माटी में मिल जाना है ।।

इमारतें ऊंची बना ली हमने ,
वसुंधरा को कष्ट दिया ,
पेड़ पौधों को काट – काट कर ,
वनस्पति को नष्ट किया ,
जगह-जगह भूचाल यहां पर ,
भूकंप में फटती धरती है ,
नई कोंपलों को अब रोंप कर ,
इस उपवन को सजाना है ,
धरती मां की देखरेख कर हमको फर्ज निभाना है ,
माटी से ही जन्म हुआ है माटी में मिल जाना है ।।

खत्म स्वयं हम कर रहे हैं ,
अपनी ही प्यारी वसुधा को ,
अंधकार में झोंक रहे हैं ,
खुद अपनों के जीवन को ,
धरा ने ही सहेज के रखा ,
जल , वायु और अग्नि को ,
इस दुनिया‌ से प्रदूषण को ,
हम सबको मिलके मिटाना है ,
धरती मां की देखरेख कर हमको फर्ज निभाना है ,
माटी से ही जन्म हुआ है माटी में मिल जाना है ।।

Published by Beingcreative

A homemaker exploring herself!!

13 thoughts on “” धरती “

  1. माटी मस्तक पर लगा कर
    दृढ़ संकल्प निभाना है
    जनम लिया है जिस धरती पर
    कुर्बान उसी पर हो जाना है
    माटी में ही जनम लिया है
    एक दिन माटी में मिल जाना है

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