“किसी के जाने का दुख”

” रंगमंच ये दुनिया सारी ,
हर इंसान अभिनेता है
अपना – अपना अभिनय करके
हर कोई चल देता है ।”

यह दुनिया एक रंगमंच ही तो है जहां पर तरह – तरह के नाटक होते हैं और अनेक कथाओं का जन्म होता है , मनुष्य एक अभिनेता है जो अपना किरदार निभाकर , अभिनय कर , अपना आयुष्य पूर्ण कर इस दुनिया से प्रस्थान कर जाता है । ऐसा ही होता आया है और होता भी रहेगा । यह सब जानते हैं परंतु किसी आत्मजन को खोने का दुख कभी-कभी हर तथ्य पर भारी पड़ जाता है । सृष्टि में ऐसा कोई नहीं जिसे किसी अपने के जाने का दुख ना सता रहा हो । हम उस व्यक्ति विशेष की यादों को सदा अपने हृदय में संजोकर रखते हैं परंतु उसके जन्मदिवस या पुण्यतिथि पर हमारा मन अवसाद से भर जाता है , अश्रु आंखों की सीमाओं को तोड़कर बह निकलते हैं ।‌ हम उस दिन घटी घटनाओं के बारे में विचार करते ही रहते हैं , जिससे हमें अत्यंत पीड़ा होती है ।

यह जीवन तो क्षण भंगुर है जो आया है वह जाएगा ही । हर व्यक्ति जन्म से पहले ही मृत्यु का समय लिखा कर आता है पर मानव मन किसी अपने के जाने से विषाद से भर जाता है ।

एसा क्यों होता है ?

जिस व्यक्ति का जिस से जितना लगाव होता है वह उतनी ही पीड़ा से तड़प उठता है । उसके साथ बिताया प्रत्येक क्षण आंखों के समक्ष चलचित्र के समान दिखने लगता है और अश्रु धारा बह निकलती है । परंतु कभी आपने सोचा है कि ऐसा करने से उस आत्मा को कितनी वेदना पहुंचेगी जो हमारा साथ छोड़ कर जा चुकी है और कहीं और वास कर रही है , हम अनजाने ही अपने प्रियजन की आत्मा को कष्ट पहुंचाते हैं क्योंकि आत्मा का आत्मा से सदैव ही जुड़ाव रहता है । मैं सदा ही कहती हूं कि किसी को भी याद करने का तरीका केवल एक ही होना चाहिए ‘ मुस्कुराकर ‘ ।

परमपिता परमात्मा से यही अरदास करनी चाहिए कि वह आत्मा जहां भी है वह सुखी रहे । हमें दिवंगत प्रियजन के लिए प्रार्थना करनी चाहिए , उसके नाम से गरीबों को खाना खिलाने और दान देने से हमारा दुख भी कम होगा , मन को शांति मिलेगी और उस आत्मा को आशीष मिलेगा । हमें और क्या चाहिए ? हम भी तो यही चाहते हैं कि हमारे दिवंगत प्रियजन जहां भी रहे कुशल पूर्वक और सुख से रहें भले ही हम से दूर रहें ।

आप सोचेंगे कहना सरल है और करना कठिन परंतु मैं जैसा कह रही हूं अमल भी कर रही हूं । आज मेरा मन भी किसी अपने के जाने से विचलित है और मैं उसकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना ही कर रही हूं । इस मन्ह: स्तिथि में लेख लिखना कष्टकारी है परंतु एक सखी ने कहा कि तुम्हारे पास एक माध्यम है अपनी बात कहने का तो अपने मन के विचार लिख डालो , शायद ऐसा करने से किसी और को भी प्रेरणा मिले अपना दुख और अवसाद कम करने की । इसीलिए थोड़ी हिम्मत जुटा पाई यह लेख लिखने की ।

Published by Beingcreative

A homemaker exploring herself!!

5 thoughts on ““किसी के जाने का दुख”

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