” जाने क्यों “

ऐसे भी हमसे क्या कसूर होते हैं ,
जिनसे प्यार हो वही हमसे दूर होते हैं ,
दुनिया से क्यों करें शिकवा अब ,

जानेे क्यों झूठे से लगते हैं रिश्ते सब ,
ऐसे भी जाने क्या मजबूरी थी ,
उनकी बेवफाई से हम मशहूर होते हैं ।
हाथ की लकीरों से क्या करें बंदगी ,
पानी सी फिसल रही है जिंदगी ,
ख्वाब जो चमकते थे अशनूर की तरह ,
सारे के सारे ही ‌चकनाचूर होते हैं ,
ऐसी भी हमसे क्या कसूर होते हैं
जिन से प्यार हो वही हमसे दूर होते हैं ।।

Published by Beingcreative

A homemaker exploring herself!!

19 thoughts on “” जाने क्यों “

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