” मां – बाप “

जिस बच्चे को दुनिया में लाने के लिए
मां सौ दुख झेलती है ,
वही मां आज किसी काम की नहीं ,
जो बाप बच्चे की हर सुख – सुविधा के लिए
अपनी हर खुशी का बलिदान देता है ,
उसे ही दुनियादारी की समझ नहीं ,
जिस छोटे बच्चे की तुतलाती भाषा
मां-बाप झट से समझ जाते थे ,
आज वही बच्चा अपने मां-बाप की बोली हुई बात भी समझ पाता नहीं ,
जो सर किसी के आगे कभी झुका नहीं
बच्चे की जिद के आगे हर बार झुकता रहा ,
पर उन मां – बाप को बच्चे की परवाह ही नहीं ,
बच्चे की परवरिश के लिए अपने
संगी-साथी तक जिन्होंने छोड़ दिए ,
वही बच्चों के दोस्तों में कहीं गुम हो कर रह गए ,
जिन बच्चों को मां – बाप ,
हमेशा साथ लेजाकर फ़ूले न समाते थे ,
वही बच्चे आज मां – बाप से कतराते फिरते हैं ,
शायद इसे ही आधुनिक युग कहते हैं ,
कभी किसी मां – बाप पर यह दिन ना आए
कि वो अपने बच्चे के मोहताज हो जाएं ,
काश भगवान हर मां – बाप के ,
हाथ पैर सलामत रख कर ही इस दुनिया से विदा करवाए ।

🙏🙏🙏🙏

Published by Beingcreative

A homemaker exploring herself!!

7 thoughts on “” मां – बाप “

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