” सपने “

क्या आप सपनों को सुन पाते हैं ?
क्या वह आपको कुछ कह पाते हैं ?
जाने मेरे सपनों से क्या नाते हैं ,
वो मुझे बहुत कुछ कह जाते हैं ,
होने वाला अनदेखा बता जाते हैं ,
आने वाली परेशानी से चेता जाते हैं ,
आने वाली खुशियों की झलक दिखला जाते हैं ,
कहते हैं सपने सबको आते हैं ,
पर समझ किसी – किसी को आते हैं ,
लगता है ज्यूं भगवान के इशारे बन जाते हैं ,
कभी-कभी विचलित भी कर जाते हैं ,
अजीब यह है कि इनका आदि और अंत समझ ना आते हैं ,

संबंधित व्यक्ति को पूछने में मन के भाव बहुत सकुचाते हैं ,
पर मन की व्यथा लोग कहां समझ पाते हैं ,
कभी उतावला कभी बेवकूफ कह जाते हैं ,
जब तक समाधान ना निकले अजीब सी बेचैनी भर जाते हैं,
जाने क्यों यह मुझे आकर ऐसे तड़पाते हैं ?
शायद रूह से रूह का रिश्ता समझा जाते हैं ।।

Published by Beingcreative

A homemaker exploring herself!!

11 thoughts on “” सपने “

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