“आज का बच्चा “

दिमाग ने किया एक सवाल ,
क्या है बच्चा ?
हमने कहा ,
जिसका मन है केवल सच्चा,
अनुभवों में जो है कच्चा ,
कभी ना दे जो किसी को गच्चा ,
शायद यही है एक बच्चा !
हां यही है नेक बच्चा ।

पर……

क्या हम नहीं खेल रहे हैं
बच्चों के आने वाले कल से ,
भोले – भाले बचपन को ,
तहस-नहस कर दिया coin master के छल से ,
Pub g की मारधाड़ ने ,
प्रेम – प्यार की बलि चढ़ा दी ,
Mobile , I pad ने परिवार से दूरियां और बढ़ा दीं ,
अंधकारमय इनका भविष्य है ,
हीनता का पुट अवश्य है ,
बौखला गया है आज हर बच्चा ,
कैसे बन पाएगा सच्चा ?
क्योंकि उसने देखा है ,
भ्रष्टाचार का भयंकर तांडव ,
नहीं बन सकता है वो पांडव ,
कृष्ण नहीं है उसके साथ ,
जो सही रास्ता दिखाएं पकड़ कर हाथ ,
गुंडाराज है यहां पर ,
मनुष्य का मूल्य नहीं धरा पर ।

अब….

हमें बचाना है बच्चों को ,
बताना है सही लक्ष्य उनको ,
चलाना है उन्हें एक पथ पर ,
हर नेकी को रहें वो तत्पर ,
कफन भी बांधे अपने सिर पर ,
पडे जब संकट मातृभूमि पर ,
यह संभव होगा तभी ,
प्रेम से मिलजुल कर रहे सभी ,
होगी नहीं जब कोई अड़चन ,
तभी बचेगा कोमल बचपन ,
आओ प्रण यह आज करें हम ,
बच्चों के मार्गदर्शक बने हम ,
जब हर बच्चा उन्नति करेगा ,
भारतवर्ष तभी तो प्रगति करेगा ।

Published by Beingcreative

A homemaker exploring herself!!

4 thoughts on ““आज का बच्चा “

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