” कानों को चैन “

जो बेचारे कान ,
2020 में थे बहुत परेशान ,
चश्मे की डंडी और मास्क की डोरी से ,
निकल सी रही थी जिनकी जान ,
जो उलझन में थे घमासान ,
शायद उन कानों को 2021 में आए चैन ,
हो जाए खत्म शायद उनका बैन ।

तरस रहे थे जो बेचारे ,
खुसर – फुसर की आवाजों को ,
सहेलियों के झुंड के ठहाकों को ,
यारों की बेबाक बातों को ,
वर्क फ्रॉम होम के कारण
बॉस की गरम – गरम झिकझिक को ,
रिश्तेदारों की बेवजह चिक-चिक को ,
शायद उन कानों को 2021 में आए चैन ,
हो जाए खत्म शायद उनका बैन ।

बस इन बेचारे कानों की यही है फरियाद ,
2020 की खट्टी – मीठी यादों को ,
करते रहना याद ,
थोड़े में ही अब खुश रहना ,

किसी की अहमियत फिर मत भूलना ,

2021 के बाद ,
भूल ना जाना पड़ोसियों से सौहार्द ,
प्रकृति के महत्व को ,
आपसी अपनत्व को ,
झेल लेंगे हम आगे भी चश्मे और मास्क की उलझन ,
प्रेम की महक को वैसे ही बरकरार रखना ,
जैसे महकता है फूूलों भरा उपवन ,
तभी आएगा हम बेचारे कानों को चैन ,
हो जाए खत्म शायद हमारा बैन ।।

Published by Beingcreative

A homemaker exploring herself!!

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