” विचारों की लस्सी “

Facebook, Insta और Twitter ने
ले रखी है जान ,
ना चाहते हुए भी जाता है बार-बार
इन पर ध्यान ,
हम भी हो जाते हैं fussy ,
और बनने लग जाती है विचारों की लस्सी ।

Beauty और fashion वीडियो देखकर ,
बढ़ जाता है depression ,
Inner beauty से टूट सा जाता है connection ,
दूसरों की figure तो लगे पतली रेशम की तार जैसी ,
अपनी body लगने लगती है मोटी jute की रस्सी ,
और बनने लग जाती है विचारों की लस्सी ।

Cooking videos भी कम क़हर नहीं ढा़ती हैं,
नई-नई dishes बनाने को नियत ललचा जाती है ,
Grocery की list बढ़ती ही चली जाती है ,
Wallet की economy भी बिगड़ सी जाती है ,
Dish ठीक ना बनने पर जब
घरवाले रोक नहीं पाते अपनी हँसी ,
फिर बनने लग जाती है विचारों की लस्सी ।

हद तो तब हो जाती है घनघोर ,
जब लोगों के weekend trips का दिखता है शोर ,
उनकी मस्तीभरी pics देख – देख कर
अपना जीवन लगने लगता है बोर ,
उमड़ – घुमड़ के चहुं ओर से
इच्छाएं कर देती हैं हमें mussy ,
और बनने लग जाती है विचारों की लस्सी ।

ऐसे भयंकर विचार आएंगे तो हम कहां जाएंगे ?
इतनी लस्सी बना – बना के mind की बत्ती ही बुझाएंगे ,
जो मिला है उसी में अगर सुख पाएंगे
तब ही तो peacefuly जी पाएंगे ।

Published by Beingcreative

A homemaker exploring herself!!

4 thoughts on “” विचारों की लस्सी “

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