” इंसान का जिस्म “

इंसान का जिस्म क्या है ?
जिस पर इतराता है जहां ,
बस एक मिट्टी की इमारत ,
एक मिट्टी का मकां ,
खून तो गारा है इसमें
और ईंटे है हड्डियां ,
चंद सांसों पर खड़ा है ,
यह ख्याली आसमां ,
मौत की पुरजो़र आंधी
इससे जब टकराएगी ,
जितनी भी महंगी हो ये इमारत
टूटकर बिखर जाएगी ।

“SUFFOCATION”

Suffocation is not only in the environment . It is deep down . We can control the environmental suffocation sooner or later but mental suffocation in other words mental stress can’t be healed easily . Everybody across the world of all the age groups are stressed . Stress levels might differ but it makes our mind enfeeble . This is proved to be the root cause of grief and uneasiness .

Emotional suffocation is also prevailing now a days . Psychotherapist and relationship expert ,
‘ REBECA OGLE ‘ once stated ,

“An emotionally suffocating relationship is one in which one or both people do not feel that they have freedom to be their authentic selves. “

Every bond between relations are shattered just because of our ego . Everybody wants to be on a upper hand to prove that he is supercilious . This leads to utmost suffocation and loneliness .

God created humans to serve mankind and brotherhood but most of us made our life hell by being egocentric . To recieve triumph we are keeping humanity on stake . This cut throat competition is making us drown in the ocean of darkness . We have suffocated ourselves to be the best . Why we want to prove to be the winners ? There is nothing to lose or win in the world except our life .

Did you ever think that a foetus in mother’s womb grow to a baby without suffocating himself . A baby can survive in a tiny womb for nine months only with mother’s love and care . He gets oxygen through umbilical cord but still he grow .

It proves that we only need love and care to live in this earthy world . We have created all such suffocations ourselves . If we want to get rid of these we also need an ‘ Umbilical Cord Of God ‘ and that is love and kindness . It is the only key to attain eternal happiness and It would make world a better place to live in .

‘ HENRY JAMES ‘ once said ,

Three things in human life are important ;
The first is to be kind , the second is to be kind and the third is to be kind “

” कोरोना वार्ड “

आज ना जाने क्यों मन विचरते हुए करोना वार्ड में चला गया , सब की बेबसी देख दिल दहल गया । इंटेंसिव केयर यूनिट खचाखच भरा हुआ था और वार्ड भी । पीपीई किट में नर्सेज और स्टाफ मानो खुद से ही जंग लड़ रहे थे । हम सोच भी नहीं सकते कितना कठिन है इतनी लेयर्स पहन के भागदौड़ करके रोगियों का ध्यान रखना । कईं बार दिल घबरा भी जाता होगा परंतु फिर भी डटकर खड़े हैं यह सेनानी । कुछ पेशंट्स थोड़े नॉर्मल लगे , कुछ बेहोशी के आलम में थे । कुछ इतने कमजोर के सामने पड़ा चाय का कप नहीं उठा सकते । कुछ रोगियों के क्रंदन भरे स्वर आत्मा को झकझोर गए । कुछ रोगियों की चीखें रोंगटे खड़े कर गईं । दर्द से छटपटाते रोगियों की ह्रदय विदारक चीखें विचलित कर गईं । ऐसी भयंकर वेदना भगवान किसी को ना दे परंतु जो किस्मत में लिखा है उसे कोई बदल नहीं सकता । इस भीषण बीमारी में कोई अपना सगा संबंधी साथ नहीं , किसी अपने का हाथ नहीं , बस शून्य में ताकते रोगी जीवन का हिसाब – किताब करते नजर आए , पाप और पुण्य सब सामने दिख रहा होगा , यह पता नहीं कि यहां से निकल पाएंगे या नहीं , मन भी अति व्यग्र होगा पर कहें‌ किससे ? ना ही कोई सुनने वाला ना ही समझने वाला । मन में विचार तो आते होंगे और खूब पीड़ा पहुंचाते होंगे । अपनों को देख भी पाएंगे या नहीं यही ख्याल बार-बार आता होगा । सोचते होंगे ऐसा क्या किया जो यह वेदना पाई । बेड सोल की पीड़ा भी सताती होगी । ऑक्सीजन और वेंटीलेटर की पाइपें अति दुखदाई होंगी । जाने क्या चलता होगा मन में । कुछ मन में निश्चित भी करते होंगे कि यदि यहां से निकल गए तो ऐसा करेंगे या वैसा करेंगे । प्रत्येक क्षण प्रभु का सिमरन करते होंगे । मन विचलित हो उठा और बाहर की ओर निकला और विचार करने लगा जो रोगी सक्षम है वह तो अस्पताल में पहुंच गए और जो इलाज का खर्च नहीं कर सकते उनका क्या ? इलाज के साथ रोगियों का यह हाल है बिना इलाज के जाने क्या होगा । काश यह सब यहीं समाप्त हो जाए । बहुत कुछ खो चुके अब खोने की क्षमता नहीं । अपनों की तकलीफ देख दिल बहुत रोया….. अब बस !
कभी सोचा ना था एक ही बीमारी से एक ही समय में पूरे विश्व में इतने प्राण संकट में पड़ेंगे और कितने ही प्राण पखेरू उड़ जाएंगे ।

क्या विनाश लीला शुरू हो गई ?
क्या प्रलय का समय आ गया ?

बहुत कुछ बिखर गया परंतु अब भी हम काफी कुछ समेट सकते हैं , सतर्कता बरतना अति आवश्यक है । अगर कोई हमें बेवकूफ या डरपोक कहता है तो ठीक है हम डरपोक ही सही परंतु अपने घर में सुरक्षित हैं ।
आप सभी से निवेदन है कि आप अपने परिवार के लिए अति महत्वपूर्ण है तो यथासंभव सावधानी बरतें और अपने परिवार को भी सुरक्षित रखें । मैं मानती हूं रोजी – रोटी के लिए बाहर जाना आवश्यक है परंतु उसके अलावा कृपया बाहर मत जाइए । यदि जीवित रहे तो शादी आदि प्रसंगों में भी सम्मिलित हो पाएंगे , यदि श्वास चलते रहे तो दूसरों के दुख में भी सम्मिलित हो रिश्ते – नाते निभा पाएंगे । इस आपदा में हमें हिम्मत नहीं हारनी अपितु अपनी इच्छा शक्ति मजबूत रख इस महामारी को हराना है । सबके साथ से यह संभव है । इस माहौल में भी हमें सकारात्मकता का दामन नहीं छोड़ना ।

” ये समय भी निकल जाएगा तू गम ना कर ,
हर मुश्किल आसान होगी प्रयत्न तो कर ,
सावधानी बरत अब तो संभल ,
तभी तो खुद को बचा पाएगा ,
परिवार को भी सुरक्षित निकाल लाएगा ।। “

अंत में इतना ही कहूंगी कि सुरक्षित रहें , स्वस्थ रहें 🙏🙏

” छोटा खोटा नहीं होता “

जरूरी नहीं आकार में छोटा जंतु कमजोर हो ,
क्योंकि एक छोटी सी चींटी हाथी को कर देती है धराशाई ,
जरूरी नहीं आकार में छोटा व्यक्ति कमजोर हो ,
क्योंकि सचिन के बल्ले में असीम प्रतिभा है समाई ,
लाल बहादुर शास्त्री जी ने नाटे होकर भी
राजनीति में बनाई अलग पहचान ,
छोटे कद का नेपोलियन बना सेनानायक महान ,
हौसले गर बुलंद हो तो सपने भी भर सकते हैं उड़ान ,
छोटे आकार के व्यक्ति भी जीत सकते हैं जहान ,
ना सोचो कि छोटे से तिनके में नहीं है जान ,
तिनका – तिनका जोड़ने से ही होता है नीड़ का निर्माण ,
दिखावट और बनावट के फेर में
धोखा खा सकता है इंसान ,
पर अपनी किसी भी कलाकृति में
फर्क नहीं करते भगवान ,
छोटी सी उम्मीद भी
बना देती है बिगड़े सारे काम ,
इस धरा पर ना कोई बड़ा ना ही छोटा है ,
यह भ्रम तो मस्तिष्क में होता है ,
इसी विचारधारा का तो करना है मर्दन ,
अपनी कनिष्ठिका पर ही कान्हा ने उठाया था गोवर्धन ।

“Who is a good friend”

Whenever you are thoughtful , concerned , caring and trusting you are a good friend .

Whenever you are eager to share especially someone’s sorrows and joys and generous with the help and time you spend you are a good friend .

Whenever you desire to give all you have you are a good friend .

Whenever you are ready with the word of hope , cheer and fortuitous to listen with patience and try to understand till the end you are a good friend .

Whenever you are loving and there to stand by simeone you are a good friend.

Whenever you try to mend a broken bond you are a good friend .

” जाने क्यों “

ऐसे भी हमसे क्या कसूर होते हैं ,
जिनसे प्यार हो वही हमसे दूर होते हैं ,
दुनिया से क्यों करें शिकवा अब ,

जानेे क्यों झूठे से लगते हैं रिश्ते सब ,
ऐसे भी जाने क्या मजबूरी थी ,
उनकी बेवफाई से हम मशहूर होते हैं ।
हाथ की लकीरों से क्या करें बंदगी ,
पानी सी फिसल रही है जिंदगी ,
ख्वाब जो चमकते थे अशनूर की तरह ,
सारे के सारे ही ‌चकनाचूर होते हैं ,
ऐसी भी हमसे क्या कसूर होते हैं
जिन से प्यार हो वही हमसे दूर होते हैं ।।

” House Help “

Who are house help ?


The person who help us in performing our household chores in a better and comfortable way are house help .

Without their support our life would be a clutter . We ladies hold something for them as we know how tiring and demanding there job is but gents are sceptical about their significance . All the time our husbands say that we cosset our maids and overindulge ourselves . During the lockdown , gents stint at home doing household chores proved to be a reality check of househelp’s worth . This pandemic made us value each and every person around us and househelp are not exceptions .

They are always on their toes to serve us but do we repay them in any form other than their salary ?

We should support them emotionaly and financialy by taking good care of their needs and appreciating their craft . They are skilled to mantain our homes to make us comfortable . They don’t wish more except our respect and affection afterall they make our homes cosy to live in . They are worried for our well being like a family member and it’s our duty to treat them as one because

They are somebody’s reason to smile and relax .

” इस्तेमाल “

एक लेखक के मन में सदा ही उथल-पुथल मची रहती है , भावों और विचारों का आवागमन चलता ही रहता है । आज खुद को हम से संबोधित करने की इच्छा जागृत हुई तो ऐसा ही कर रहे हैं ।

यूं तो हम अक्सर अपने जीवन के अनुभव और प्रसंगों से प्रेरित होकर लेख या कविताएं लिखते रहें हैं परंतु आज का विचार हमारा व्यक्तिगत नहीं है अपितु कई लोगों के मन में यह विचार आता होगा कि उन्हें स्वार्थ वश इस्तेमाल किया जाता है । हम आज अपने जीवन के कुछ प्रसंग आपके साथ सांझा करना चाहते हैं ।

कुछ लोग समाज में या यूं कहें संसार में ऐसे हैं जो केवल अपनी ज़रूरत के हिसाब से किसी से संबंध रखते हैं और कुछ लोग हमारे जैसे होते हैं जो यह जानते हुए भी किसी की मदद करते हैं की उन्हें इस्तेमाल किया जा रहा है । ऐसे लोगों को आप क्या कहेंगे ? जो जानते बुझते अपने साथ ऐसा होने देते हैं । आम भाषा में ऐसे लोगों को बेवकूफ कहा जाता है और मुझे प्रसन्नता हो रही है आप सब को यह बता कर कि ” हां हम एक बेवकूफ हैं । ” यह हमारे लिए नकारात्मक संबोधन नहीं है। हम इसे अपनी प्रशंसा मानते हूं । हमें गर्व है इस बात पर । जानिए कैसे !

बचपन से हमें ऐसे दोस्त और बुद्धिजीवी मिले जो केवल अपने मतलब और काम निकलवाने के कारण हमारा इस्तेमाल करने के लिए हमारे समीप आए । अल्पायु में पिता के देहांत के बाद‌ हम और मां अकेले थे , कोई पुत्र ना होने की वजह से मां के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना हमारा कर्तव्य था जो हम सहर्ष निभा रहे थे । इसी यात्रा में ऐसे बुद्धिजीवियों से हमारा आमना-सामना हुआ । दसवीं कक्षा में हमने गाड़ी चलाना सीख लिया शायद इसी कारण कुछ नए दोस्त बने जो जो हमसे बात भी नहीं करते थे परंतु अब वह कभी हमारे साथ स्कूल जाते कभी बाज़ार और कभी घूमने फिरने और हम ड्राइवर बने उन्हें भ्रमण कराते । नृत्य , गायन और नाटकों में बचपन से ही रुचि होने के कारण युवावस्था में अनेकों बार लोग हमसे इसका ज्ञान प्राप्त करने के लिए रिश्ते बनाने लगे क्योंकि निशुल्क सेवा किसे अच्छी नहीं लगती । हम ठहरे बेवकूफ सब जानते हुए भी लोगों के झांसे में आते रहे और उन्हें संतुष्टि मिलती रही । विवाह उपरांत हम नए क्षेत्र में पहुंच गए और हमारी कलाएं लोगों के समक्ष उभर कर आने लगीं बस फिर क्या था वही सिलसिला फिर से शुरू हो गया । हम यह नहीं कहते की हर कोई हमें इस्तेमाल करने वाला ही मिला , बहुत से रिश्ते ऐसे मिले जो केवल प्यार और व्यवहार से जुड़े थे । जैसे बगिया में विभिन्न प्रकार के फूल होते हैं उसी की भांति समाज में भी नाना प्रकार के व्यक्ति होते हैं । बच्चों को स्कूल छोड़ने जाना या लाना हो , बाज़ार जाना हो या और कोई काम हो तो हम जैसे बेवकूफ दूसरों की सहायता करने से पीछे नहीं हटते । हमारा उद्देश्य केवल यह होता है कि हम तो जा ही रहे हैं तो दूसरे बच्चों को भी साथ बैठा लिया जाए , यदि बाजार जा रहे हैं तो अड़ोस पड़ोस वालों को साथ ले चले जहां हम कुछ खरीदारी करेंगे वहीं दूसरा भी कर लेगा । हम जैसे लोगों की टैक्सी सर्विस सदा चालू ही रहती है और हमें इसमें आनंद मिलता है परंतु विभिन्न लोगों की विचारधारा में ऐसा करके हम महान बनने का प्रयास कर रहे होते हैं । खैर चलिए आगे बढ़ते हैं दिल्ली महा नगरी को छोड़ जब हम पंजाब के एक शहर में परिवार सहित जीवन की नई पारी खेलने पहुंचे तो नए क्षेत्र में नए लोग भी मिले जो हमारे व्यक्तित्व और गुणों से प्रभावित होकर हमें प्रेम करने लगे और कुछ और‌ बुद्धिजीवी मिले जिन्हें हमारी आवश्यकता थी परंतु हम तो हम हैं , बदल थोड़ी सकते हैं खुद को । अनेकों बार खुद को इस्तेमाल होता देख प्रसन्न होते रहे । अब चाहे लोग हमें डिप्लोमेट , पाखंडी , वर्णसंकर आदि अनेक नामों से बुलाएं परंतु हमें पता है हम वही बेवकूफ हैं जो हर समय हर किसी की भी सहायता के लिए तत्पर है । मिथ्या नहीं कहेंगे कि हमें इन बातों से फर्क नहीं पड़ता , अनेक बार मन विचलित हो उठता है अपने लिए यह शब्द सुनकर , शब्दों के दंश तो हमें भी चुभते हैं परंतु यही सोचते हैं कि भगवान ने हमें योग्य समझकर ऐसा हुनर बख्शा है जिससे हम लोगों के काम आ सकें । मन यही सोच कर आह्लादित हो उठता है कि हम किसी के काम तो आ रहे हैं । काम के लिए ही सही कोई हमें याद तो कर रहा है , वरना इस संसार में अधिकतर व्यक्ति ऐसे हैं जिनके अस्तित्व से भी लोग अनभिज्ञ हैं तो उन्हें स्मरण रखना तो बहुत दूर की बात है ।

चेहरे पर मंद मुस्कान आ जाती है जब लोग यह दर्शाते हैं कि वह हमारे शुभचिंतक हैं , उन्हें यह भ्रम रहता है कि वह हमें कितनी सरलता से मूर्ख बना रहे हैं । जीवन के कटु अनुभवों ने हमें मनुष्य को पहचानने की समझ दी है और हम भलीभांति लोगों की मंशा को समझ भी सकते हैं और देख भी सकते हैं परंतु हमें आत्मिक शांति मिलती है लोगों की किसी भी प्रकार से सहायता करने में । आप इसे हमारी उत्पादन त्रुटि या जन्मसिद्ध अधिकार मान सकते हैं क्योंकि हम ऐसे ही हैं ।

तो क्या हुआ अगर हम किसी के उन्नति करने के शिखर पर पग रखने के लिए सीढ़ी बने , तो क्या हुआ अगर हमारे कारण किसी का काम बन गया , तो क्या हुआ जो हमारी वजह से किसी के चेहरे पर मुस्कान खिली । हमारा अस्तित्व किसी के काम तो आया । उनका कर्म उनके साथ और हमारा हमारे साथ ।
कुछ पंक्तियां समाज के हम जैसे तथाकथित बेवकूफ व्यक्तियों के लिए ।

हम खुश हैं,
कि हमारे कारण कईं लोग आगे बढ़े हैं ,
हम खुश हैं ,
की हम किसी ना किसी के लिए आज भी खड़े हैं ,
हम खुश हैं कि हम किसी की ज़रूरत बन सके ,
हम खुश हैं कि हम किसी के साथ चल सके ,
शुक्रिया उस खुदा का जिसने हमें ऐसा बनाया ,
हर किसी को हमने अपने दिल से लगाया ,
जिसको जितनी ज़रूरत थी उसने उतना जाना हमें ,
अपनी सहूलियत के हिसाब से पहचाना हमें ,
हमारे जैसे बेवकूफ अक्सर होते हैं कम ,
जो किसी की मदद के लिए तैयार रहते हैं हरदम ।