“तस्वीरें”

तस्वीरें खामोश रहकर भी बहुत कुछ कह जाती हैं,
यह जिंदगी के बीते पलों को समेट लाती हैं ।
जब भी इन्हें उठा कर देख लो,
ये हमें कुछ ना कुछ बताती हैं,
हमारे ही बीते दिनों की कहानी हमें ही सुनाती हैं।
कभी आंखों में चमक ,
कभी होठों पर मुस्कान दे जाती हैं,
कुछ खट्टी कुछ मीठी यादों को ताजा कर जाती हैं।
कभी बचपन से मिलवा जाती हैं,
कभी जवानी से रूबरू कराती हैं।
जीवन के कई किस्सों को ,
हमारे ही कई हिस्सों को,
हमसे ही मिलवा जाती है ।
इस भाग दौड़ भरी दुनिया में,
हमारी थकन को कम कर जाती है ।
हमारी नीरस सी जिंदगी में ,
कुछ रंग मतवाले से बिखरा जाती हैं ।
कुछ छूटे रिश्तों को ,
कुछ रूठे चेहरों को फिर से मिलवाती हैं ।
कभी-कभी इन्हें देख कर,
आंखें भी भर आती हैं ।
पहले ढूंढने में मेहनत लगती थी ,
अब तो एक स्पृश से ही आ जाती हैं ।
ये तस्वीरें …….
खामोश रहकर भी बहुत कुछ कह जाती हैं,
बहुत कुछ कह जाती है!!!

Who am I ??

Who am I ?
I am a bird whose wings are chopped ,
I am a picture that is cropped ,
Only to satisfy others ??

Who am I ?
I am a musical note which is lost,
I am a jewel without any cost,
Only to please others ??

It can not happen now,
I will not allow,

I want to fly,
I want to enjoy,
I want to be heard,
I want to be loved….

In this vast world ,
I want a petite space,
I want solace ,
I don’t want to chase…..

I want to breathe,
Breathe in the air which is pure,
I want to know myself
The way I haven’t before……

I want to b like a sea shore,
That loves to be with its waves,
I want to explore,
I don’t want anything more……

You can never loose hope,
You just have to try,
To find the answer for
Who am I ??

” जिंदगी “

कुछ कविताएं जिंदगी की नजर !!


क्यों जिंदगी की राहें उलझ जाती हैं,
क्यों सीधा-सीधा चलते भी मंजिलें बिछड़ जाती हैं,
क्यों जो अपने लगते हैं, बेगाने हो जाते हैं,
क्यों अपने ही चेहरे अनजाने हो जाते हैं,
जिन पर कभी नाज था क्यों वो बेमाने हो जाते हैं,,
कुछ सवालों का जवाब ढूंढती जिंदगी में,
क्यों आंखें नम हो जाती है,
क्यों जिंदगी की राहें उलझ जाती हैं,
क्यों सीधा सीधा चलते भी मंजिलें बिछड़ जाती हैं????????

जिंदगी अबूझ पहेली सी है,
जैसी भी है एक सहेली सी है।
खुशी और गम में साथ देती है,
कभी मुश्किल में फंसाती ,
कभी हर मुश्किल से निकाल लेती है।
कभी विचारों का मंथन कराती ,
कभी उन्हीं विचारों के भंवर से निकाल लेती है।
और कोई दे ना दे जिंदगी जरूर साथ देती है।
कभी नरम तो कभी हठीली सी है,
कभी भीड़ तो कभी अकेली सी है।
जिंदगी अबूझ पहेली सी है ,
जैसी भी है एक सहेली सी है!!

जिंदगी के फलसफे भी अजीब होते हैं,
कभी हम किसी के और कभी किसी के करीब होते हैं,
कोई हमसफ़र हमेशा साथ चले ये भी नसीब होते हैं,
कोई रिश्तों से अमीर तो कोई गरीब होते हैं,
कुछ ख्वाब अधूरे कुछ बेतरतीब होते हैं,
जिंदगी के फलसफे भी अजीब होते हैं।

कहते हैं कि इंतिहान लेना जिंदगी का काम है,
पर ये इतना कहां आसान है,
कहीं शिकवे कहीं शिकायतें,
कहीं प्यार कहीं मोहब्बतें,
फिर भी सब इससे अनजान है।
कौन कहता है जिंदगी बेजान है?
इसी जिंदगी में तो सिमटी सबकी जान है।
फिर क्या हुआ अगर यह इम्तिहान है,
जो हंसी खुशी बिताए इसे,
उसी का तो खिलता जहान है।
फिर क्या हुआ गर कोई परेशान है,
परेशानियों में ही तो खिलती मुस्कान है।
सुख नहीं रहा तो दुख भी नहीं रहेगा,
यही जिंदगी की पहचान है!!!

जिंदगी के मसलों को
खुरशीदे जस्त कर लो,
आफरीने हयात से थोड़ी तो उल्फत कर लो,
फ़िक्र ए फानी में तो मुश्त ए खाक हो जाओगे।
उश्शा़क न होंगे तो यूं ही बिखर जाओगे।
- ऋतु

आखिर क्यों ??

क्यों उसने ऐसे किया??
क्यों कोई ऐसे करता है??
सोच के दिल डरता है,
ऐसी क्या मजबूरी थी??
ऐसी क्या परेशानी थी??
क्षण भर के आक्रोश में,
भावनाओं के आवेग में,
इंसान कमजोर हो जाता है,
वह अकेला हो जाता है,
दौलत ,शोहरत ,इज्जत ,
तब कुछ काम ना आता है,
जब दिल बेजार हो जाता है,
किसी से बात करने का सोचा होता,
दिल हल्का करने का सोचा होता ,
अपनों पे भरोसा तो किया होता ,
कुछ पल और तू जिया होता,
अपनी परेशानियां खत्म करने को,
तूने सोचा ये समाधान,
मां-बाप ,परिवार के लिए,
है यह विषाद महान,
तुम तो बिल्कुल सक्षम थे,
फिर क्यों कदम उठाया ये,
अदाकार गजब के थे,
अदाकारी ही कर गए,
मन मेरा सोचने को मजबूर है,
जीवन यह क्षण भंगुर है,
कल क्या होगा पता नहीं,
किसी की इसमें खता नहीं,
चकाचौंध भरी दुनिया का,
एक सत्य उजागर होता है,
बाहर से दिखता कुछ और,
अंदर और कुछ होता है,
तेरा नाच और तेरा खेल,
ये भी तो तेरे साथी थे,
इन्हीं से कुछ पल बतियाता,
शायद मन शांति पा जाता ,
पर तू तो हिम्मत हार चुका था,
पहले ही खुद को मार चुका था,
बस एक खयाल यह आता है,
मन का दुख क्या इतना भर जाता है??
क्या और कोई रास्ता ना सूझ पाता है??
जो इंसान जिंदगी हार जाता है,
जो इंसान जिंदगी हार जाता है।

“मां की वर्षगांठ”

मेरे प्यारे दोस्तों,

आज अपनी मां के जन्मदिवस पर आप सबसे अपने मन के भाव सांझा कर रही हूं ।

आज का दिन है कुछ खास,
मां को शुभकामनाएं देने का कर रहीं हूं प्रयास।
करना थोड़ा मुश्किल है,
क्योंकि वो मां का दिल है ।
उसी ने तो जन्म दिया,
उसी ने तो सक्षम किया ।
उसको क्या दे पाऊंगी,
उसके बिना कहां जाऊंगी ।
जिसने पग पग पर दिया है साथ,
कैसे मनाऊं उसकी वर्षगांठ ।
उस मां के आगे मैं हूं बहुत छोटी,
जिसकी हर सांस मेरे लिए है होती ।
समझौते ना जाने कितने किए होंगे,
मेरे लिए कितनी बार अश्रु बहे होंगे ।
मैंने बहुत सताया होगा,
कई बार रुलाया होगा ।
फिर भी चट्टान सी खड़ी होगी,
संकटों से भी ना डरी होगी ।

पूरी करने मेरी हर आस,
मां ही नहीं पिता बन कर चली है साथ ।‌

मेरे लेख भी उससे है, मेरी कविताएं भी,
मेरे शब्दों की प्रेरणा भी ।
मेरे वजूद में उसका एहसास,
उसी की दुआ ने बनाया मुझे खास ।
मेरे संस्कार ,मेरा व्यवहार देन है उसी की,
मेरी कला भी धरोहर है उसी की ।
ऐसी जननी को दूं कुछ खास,
जिसका हो कोमल एहसास,
यही है उस ‘विजय’ की ‘ऋतु’ का प्रयास !!

“POWER OF CHANGE”

I have been thinking for a long time that everyone’s life is changing nowadays due to this pandemic.Some people are exasperated and few are contended. It’s up to us how we see ‘CHANGE’ Let me exhibit the change through a story……..

Once upon a time there was a box ‘Buddhuwho was considered worthless by everyone. Nobody liked him. He lived in a corner. Elders watched news where as kids gathered in front of him on weekends to watch ‘Chitrahaar’.

Time changed new friends came into existence ZEE, SONY,STAR and many more. He started growing. People started liking “Buddhu”. Kids wanted to be with him willing to create fantasies. He was becoming everyone’s centre of attraction. Suddenly a lady named ‘Ekta Kapoor ‘ visited him and gave him ‘variations’.

Now everybody want to be with him all the time. In his sorrows people weped and in his Joy they felt delighted. As said by ‘Frank Lloyd wright

“TV is a chewing gum for eyes”

Few people don’t like him. After couple of years The millennium megastar ‘Shri Amitabh bachchan’visited him metaphorically transforming him into a STAR. Many celebrities wanted his tie up but his busy schedule kept the stars away from working with him. He was not treated as a ‘Buddhu‘ anymore. He changed to SMART . Still a group of people hate him but as they say every loved person has haters too. ‘Andy Warhol ‘ once said,

“They always say time changes”

This happened in March 2020, the group of people who were always against ‘Buddhu‘ also changed as history repeats itself and there came ‘Shri Ram‘who visited him in this pandemic and everybody was charmed with their collaboration. Slowly “Shri Krishna “stepped in and the whole world was amused.

During lockdown buddhu was the only source of entertainment and he was delighted as his miniatures were in everyone’s palms. he was not an IDiot Box now, he was a “CHARMER“. …

This is the “POWER OF CHANGE”. Don’t fear change, just make it to be a positive one.

“We are smart enough to change”

“पिता”

“पिता गीता के वो श्लोक हैं,

जिन्हें पढ़ते तो सब है,

समझते कम है……”

आज मैं आपसे उन्हीं पिता के बारे में बात करूंगी जिनके बारे में बहुत कम कहा जाता है। मां के बारे में तो सभी बात करते हैं। मां पूजनीय है, मां से बढ़कर कोई नहीं , परंतु पिता के अस्तित्व को भी हम नकार नहीं सकते। मां अगर प्यार की बहती नदी है तो पिता उस नदी पर सब्र और शांति का बांध हैं। नदी के प्रवाह में बहना हमें अच्छा लगता है पर बांध की अहमियत तब पता चलती है जब बांध में दरारें पड़ जाती हैं और हम लड़खड़ा जाते हैं।

पिता की डांट उस कड़क चाय के समान है जो हम सुबह पीकर दिन की शुरुआत करते हैं। यदि सुबह की चाय कड़क ना हो तो दिन अच्छा नहीं निकलता, वैसे ही यदि पिता की डांट ना हो तो दिन क्या जिंदगी अच्छी नहीं गुजरती। पिता तो वह आईना है जो हमें हमारा प्रतिबिंब दिखाता है, जो कभी झूठ नहीं बोलता, हमें हमारी कमियां दिखाता है, हमें हमसे मिलवाता है। उनकी डांट और सीख के बिना हम कुछ नहीं कर पाएंगे। वह हमें हवाई जहाज की सैर कराने के लिए मीलों लंबी पैदल यात्रा करते हैं, आज के इस माहौल में अगर पिता घर से बाहर नहीं निकल रहे तो केवल इसलिए कि वह परिवार और बच्चों को सुरक्षित रखना चाहते हैं , अपनी जिंदगी के बारे में तो वो सोचते ही नहीं ,हरआपदा से बच्चों को बचाने वाले पिता ही होते हैं ।पिता नारियल की तरह है अंदर से कोमल और बाहर से सख्त परंतु लाभदायक। वह एक पेड़ की तरह है जो खुद तो वर्षा और कड़कती धूप में खड़ा रहता है पर हमें छाया और रक्षण देता है। वह चंद्र के समान हमें शीतलता प्रदान करते हैं और सूर्य के समान हमें संसार के हर उजाले से अवगत कराते हैं ,परंतु हमें तो सिर्फ उनकी डांट और फटकार दिखाई देती है उनका प्यार और समर्पण नहीं।
वह अपना सुख तो हमसे बांटते हैं पर दुख अंदर ही समेट लेते हैं, जीवन भर हमारे लिए भागदौड़ करते हैं और मृत्यु के बाद भी हमारे लिए बहुत कुछ छोड़ कर जाते है जिससे हमें परेशानी ना हो, हम आराम से जी पाएं।
कहते हैं,
‘इंसान के जाने के बाद ही उसकी कदर होती है’
पिता के होने का महत्व उनसे पूछो जिनके सर पर उनका साया नहीं, जो उनके दो बोल को भी तरसते हैं। उनकी स्थिति बगीचे के उस फूल की तरह है जो बिना माली केे मुरझा जाता है।

मां के बलिदान तो हमें दिखते हैं परंतु पिता के बलिदानों को अनदेखा किया जाता है क्योंकि वह अपनी भावनाएं व्यक्त नहीं कर पाते उनका प्यार हमारी फरमाइशों को पूरा करने में दिखता है, उनका ध्यान उनकी फटकार में दिखाई देता है पर हम समझ नहीं पाते। पिता हमें केवल नाम नहीं देते अपितु अपना सर्वस्व लुटा देते हैं, उन्हें सिर्फ प्यार और आदर चाहिए अपनी संतान से। वह हमारे बिना कहे हमारी इच्छाऐं पूरी कर देते हैं । हमें भी निस्वार्थ भावना से उनका साथ निभाना चाहिए। आज के युग में हम राम और श्रवण तो नहीं बन सकते पर अपने जन्मदाता के थकते कंधों को सहला सकते हैं, उनके कांपते हाथों को थाम सकते हैं और कह सकते हैं …..हम हैं।

ऋतु..

“रिश्ते”

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“”रिश्ते होते हैं इस नाव की तरह जो समुंदर के बीच में खड़ी है, रिश्ते होते हैं इस समुंदर की तरह जो नाव को संभाले खड़े हैं!!””

हमारी जिंदगी में बहुत से रिश्ते होते हैं,कुछ हम जन्म से पहले ही बना लेते हैं ,कुछ जन्म के बाद बनते हैं और कुछ अपनी समझऔर सूझबूझ से हम बनाते हैं। हर रिश्ते का अपना एक रंग होता है और हर रिश्ते को निभाने का एक अलग ढंग होता है। जो रिश्ता परिवार वालों के साथ होता है उसे हम सरलता ,संयम और प्रेम से निभाते हैं, जो रिश्ता समाज के साथ होता है उसमें केवल सम्मान होता है, जैसा सम्मान हमें मिलता है वैसा ही सम्मान हम दूसरों को देते हैं। दोस्ती के रिश्ते में प्यार और अधिकार होता है, यह वह रिश्ता है जो हम अपने आप बनाते हैं और सारी जिंदगी निभाते हैं। कुछ अनकहे रिश्ते भी होते हैं जो केवल आत्मा से जुड़े होते हैं ,इन रिश्तो को हम नाम नहीं दे सकते ,इस रिश्ते में आयु की सीमा नहीं होती बड़े छोटे का भेद नहीं होता ,अमीर गरीब का भेद नहीं होती ,बस जो मन को अच्छा लगे वह अपना है, जिस से रूह का मेल हो वह अपना है ।यह रिश्ते सहेज के रखने वाले होते हैं क्योंकि हम इसमें ना सम्मान से बंधे हैं ना परिवार से बंधे हैं ,केवल बंधे हैं आत्मिक संतुष्टि और आत्मिक प्रसन्नता से,जब यह रिश्ते टूटते हैं तो दिल को ठेस लगती है। रिश्ते एक नाव की तरह हैं जो दुनिया रूपी सागर में हमें समेट कर खड़े हैं जो हमें समुंदर में डूबने नहीं देते और हमें समुंदर की थपेड़ों से बचाते हैं। रिश्तो को हम समंदर भी कह सकते हैं क्योंकि जैसे समुद्र में असंख्यात लहरें होती हैं वैसे ही जब हम जन्म लेते हैं तब से लेकर हमारे मरण तक हम असंख्यात रिश्ते बनाते हैं जो हमें तरह-तरह का पाठ पढ़ाते हैं , कुछ आगे बढ़ना सिखाते हैं कुछ जीवन के सही रंग दिखाते हैं,और कुछ कष्टों को झेलने में हमारे साथ निरंतर खड़े रहते हैं , साथ चलते रहते हैं। यह हमें देखना और सोचना है कि किन रिश्तो को आगे लेकर चलना है। ज्यादा रिश्तो के बोझ को उठाने से अच्छा है प्यार से कम रिश्तो को निभाया जाए।यदि हम प्यार से रिश्ते निभाएंगे फिर वह कम हो या ज्यादा हम हमेशा खुश रहेंगे , अगर हम खुश रहेंगे तो दूसरों को भी खुशी दे पाएंगे। आज की भागदौड़ भरी दुनिया में खुशी से जीना सबसे ज्यादा जरूरी है। तो चलो हम विश्लेषण करें कि हम कौन से रिश्तो से बंधे हैं और हमें कौन से रिश्तों को लेकर आगे बढ़ना है !!!

ऋतु…

“LOCK DOWN”

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“Time to change”

We are in lockdown since 23rd of March due to Corona.
Shops are open but for a limited time . Malls, restaurants, educational institutes are still in quarantine…
During this period we learnt a lot .All of us tried to keep ourselves busy by doing new things. Few of us became chefs, few have started writing, meditating, exercising ,singing and dancing… Everybody is trying to explore themselves. Men are helping in household chores but few are still lying on beds and sofas doing nothing and some very intelligent people are roaming out without any reason ,without thinking that this pandemic is very dangerous .These people think “let it be “. Governments , doctors , sanitization n police departments are working 24/7 .
Still few people are there to complain complain and only complain these people don’t appreciate even d homemakers who are working for their well being day and night … Why don’t they think that in this decisive situation we should help each other n stay bonded .We have to fight together for our survival ….
Cooking fancy dishes,making tik tok videos , watching Netflix and cribbing will not help us to come over the pandemic… This is the time to change ourselves and our country…. After this lockdown we must start other ones like we should try to lockdown are unnecessary wishes and demands ,avoidable travel ,worthless nagging ,useless hatred and redundant betrayal. If we want to help our nation we should peer support …

We should restrict our chase getting on for d sky… This won’t lead us anywhere except depression ,sorrow and dejection.
We lived a very simple n contended life behind closed doors , caring for our family members, caring for close ones ,can’t we live like that in future ??
We need slight food to survive ,we need a petite space to live and we need a little to thrive…
God imbued that he’s the only power
we are nobody…

“”Think what we have to give ,
Let’s make this world to live “”

मां बेटी!!!

मां बेटी का रिश्ता सबसे खास होता है,

एक प्यारा सा अहसास होता है।।

बेटी होती है जब छोटी ,

मां ही उसकी दुनिया होती ।

उसे खिलौनों से ज़्यादा मां का आंचल है भाता , पहला शब्द तुतलाते हुए मां ही है निकल पाता ।

वो नन्हे कदमों से गिरते पड़ते मां तक पहुंच ही जाती ,

ये देख कर मां खुशी के आंसू छलकाती ।

मां आंसू तब भी बहाती ,जब बेटी पहली बार स्कूल है जाती ,

आंसूओं को तब भी रोक न पाती है जब बेटी कालेज में पहले स्थान पर है आती ,

बेटी तुनक के फट से कह जाती ,

कि मां तो हमेशा ही गंगा जमना है बहाती ।

मां की कोई बात अब उसे कहां थी सुहाती ,

अब उसकी दुनिया मां के आंचल में ना समाती ।

मां तो मां है हर हाल में बेटी के लिए प्राथना है करती, पर बेटी तो धीरे-धीरे मां को खुद से दूर है करती ।

मां फ़िर अपनी प्यार भरी आंखें हैं भिगाती , अब ख़ुशी के नहीं ग़म के आंसू है बहाती।

बेटी का परिवार है बढ़ता ,जीवन खुशियों से है भरता ,

छोटी सी गुड़िया के आने से ,घर आंगन है उसका खिलता।

बेटी के चलने पर भरती है जब वो अंखियां,

तब याद उसे आती है अपनी मां ,

मां का आंचल लगने लगा उसे फिर से दुनिया।

वो कुछ और सोच न पाती ,झट से मायके पहुंच जाती ,

मां को मुस्कराते हुए खड़ा है पाती ।

दौड़ के मां से लिपट जाती ,आंखों से ढेर आंसू छलकाती ,

ये क्या ??

मां की तस्वीर से माला है गिर जाती ,

बेटी अपनी गलती पर अब है पछताती ।

मां बन के ही वो मां को है समझ पाई ,

पर अब मां तो उसे छोड़कर बहुत दूर है चली गई । तस्वीर को कलेजे से लगाए वह फर्श पर ही गिर गई,

आज उसे मां की ममता बहुत याद आई।

मां मां कह के खूब है चिल्लाई,

आज उसन खुद है गंगा जमुना बहाई।

यूं ही समय की चक्की चलती जाती है,

हर मां खुशी और ग़म में,आंखों को भिगोती जाती है।यह रिश्ता ही ऐसा होता है ,

हर रिश्ता इसके आगे छोटा है।

मां बेटी का रिश्ता सबसे खास होता है,

एक प्यारा सा एहसास होता है।।

ऋतु…..