” इंसान का जिस्म “

इंसान का जिस्म क्या है ?जिस पर इतराता है जहां ,बस एक मिट्टी की इमारत ,एक मिट्टी का मकां ,खून तो गारा है इसमेंऔर ईंटे है हड्डियां ,चंद सांसों पर खड़ा है ,यह ख्याली आसमां ,मौत की पुरजो़र आंधीइससे जब टकराएगी ,जितनी भी महंगी हो ये इमारत टूटकर बिखर जाएगी ।

” छोटा खोटा नहीं होता “

जरूरी नहीं आकार में छोटा जंतु कमजोर हो ,क्योंकि एक छोटी सी चींटी हाथी को कर देती है धराशाई ,जरूरी नहीं आकार में छोटा व्यक्ति कमजोर हो ,क्योंकि सचिन के बल्ले में असीम प्रतिभा है समाई ,लाल बहादुर शास्त्री जी ने नाटे होकर भीराजनीति में बनाई अलग पहचान ,छोटे कद का नेपोलियन बना सेनानायक महानContinue reading “” छोटा खोटा नहीं होता “”

” जाने क्यों “

ऐसे भी हमसे क्या कसूर होते हैं ,जिनसे प्यार हो वही हमसे दूर होते हैं ,दुनिया से क्यों करें शिकवा अब , जानेे क्यों झूठे से लगते हैं रिश्ते सब ,ऐसे भी जाने क्या मजबूरी थी ,उनकी बेवफाई से हम मशहूर होते हैं ।हाथ की लकीरों से क्या करें बंदगी ,पानी सी फिसल रही हैContinue reading “” जाने क्यों “”

” जीने की कला “

मनुष्य को चाहिए सद्भावना जागृत रखना ,अपने और परायों के दुख का ध्यान रखना ।जाने कब टूट जाए भ्रम इस जिंदगी का ,इसलिए हर किसी को अपना बना के रखना ।अपने प्रेम से लोगों के दिल जीत कर ,हर किसी को ह्रदय से लगा कर रखना ।आती है हमेशा बहार के बाद पतझड़ ,बुरे दिनोंContinue reading “” जीने की कला “”

” इंतज़ार “

शुष्क रेगिस्तान को पानी की एक बूंद का इंतज़ार ,खुश्क हुए रिश्तों को प्यार की जलधारा का इंतज़ार ,अनुर्वर धरती को बरखा की फुहार का इंतज़ार ,अवसाद से भरे ह्रदय को प्रसन्नता का इंतज़ार ,एक मां की सूनी कुक्षी को नवजीवन का इंतज़ार ,बिछड़े मित्र को मित्रता के एहसास का इंतज़ार ,अबोध कली को उत्फुल्लContinue reading “” इंतज़ार “”

” डर लगता है “

अंधेरा हमसाया है मेरा ,उजाले से अब डर लगता है ।भूख नहीं डराती अब ,निवाले से ही डर लगता है ।फूंक – फूंक क्या कदम रखूं ,चलने से ही डर लगता है ।चोरों से क्या डरना अब ,रख वालों से डर लगता है ।धोखे , वफा की क्या चर्चा करूं ,किसी के साथ से डरContinue reading “” डर लगता है “”

” धरती “

माटी से ही जन्म हुआ है ,माटी में मिल जाना है ,धरती मां की देखरेख कर ,अपना फर्ज निभाना है ।। धरती से ही जीवन अपना ,धरती पर सजे हर सपना ,जीव सभी धरती पर रहते ,सात समुंदर यहीं तो बहते ,फल – तरकारी यहां है उगते ,धान – फसल भी यहां है उपजे ,इसContinue reading “” धरती “”

” एहसास “

सुनकर काल का अट्टाहास ,सारी उम्मीदें और सपनें ,फिरते हैं बदहवास ,शुष्क होती रक्त धमनियों के ,क्रंदन का आभास ,जाना है परम शक्ति के पास ,फिर भी मन को लगता त्रास ,किसी अपने को खोने का ,कितना भयावह एहसास ।

“धोखा “

बिन बाप की बेटी को,मां ने एक तोहफा दिया,तोहफे का नाम था पापा,मां के लिए बेटी खुश थी,कैसे कटती मां की अकेले जिंदगी,यह फैसला थोड़ा मुश्किल था ,पर बेटी को लेना पड़ा ।उसने सोचा ,जब छोटी थी तो पिता चल बसे ,शायद फिर से वही प्यार मिले ,उसने इस रिश्ते को सब कुछ दिया ,प्यारContinue reading ““धोखा “”

” नफरत को मिटाइए “

कविता में एक नया प्रयास कर रही हूं , आशा करती हूं आपको पसंद आएगा । जय श्री हमको चाहिए ,भाग्यश्री हमको चाहिए ,प्यार की जूही खिला ,नफरत को मिटाइए , नफरत को मिटाइए ।। पूजा हो यहां सभी की ,रेखा ना हो दुश्मनी की ,हीरा नहीं तो ,नीलम ही बन जाइए ,नफरत को मिटाइएContinue reading “” नफरत को मिटाइए “”