” N R I का दर्द “

बेगानी धरती पर ,बेगाने देश में रहना आसां नहीं ,पर यह दर्द किसी को दिखता नहीं ,दिखता है तो आधुनिक जीवन ,लुभाती है उनकी मोटी इनकम ,हंसते मुस्कुराते चहरों का दर्द देखा है मैंने ,परिजनों से दूर दुख – दर्द अकेले पड़ते हैं सहने ,हर तीज त्योहार में अपनों की याद अकसर आ ही जातीContinue reading “” N R I का दर्द “”